Inspirational Story In Hindi – ये कहानियां आपकी जिंदगी बदल सकता हैं।

दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम आपको 4 Best Inspirational Story In Hindi के बारें में बतायेंगे, जिसे पढ़कर आपका लाइफ में परिवर्तन आ सकता हैं। इसलिए सभी कहानी को one by one जरूर पढ़ें।

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1. जो चाहोगे सो पाओगे – Best Motivational Story in Hindi For Students

Motivational Story In Hindi : एक समय की बात हैं एक साधु नदी किनारे धुनि रमा कर दिन भर बैठा रहता था, और बीच-बीच में ऊंची आवाज में चिल्लाता- “जो चाहोगे सो पाओगे!”

उस रास्ते से आने-जाने वाले लोग उसे पागल समझते थे, सभी उसकी ये बात सुनकर अनसुना कर देते, कुछ लोग उनकी बातों पर हँसते भी थे।

एक दिन एक बेरोजगार युवक उसी रास्ते से कही जा रहा था। साधु की चिल्लाने की आवाज़ उसके कानों में भी पड़ी – “जो चाहोगे सो पाओगे!” “जो चाहोगे सो पाओगे!”

यह सुनकर युवक दौड़ता हुआ साधु के पास गया और उससे पूछने लगा, “बाबा! आप बहुत देर से जो चाहोगे सो पाओगे चिल्ला रहे हो। सच में क्या आप मुझे वो दे सकते हो, जो मैं पाना चाहता हूँ?”

तो साधु ने कहा, “हाँ बेटा जरूर, लेकिन पहले मुझे ये बताओ कि तुम पाना क्या चाहते हो?”

युवक ने कहा – “बाबा! मैं चाहता हूँ कि एक दिन मैं हीरों का बहुत बड़ा व्यापारी बनू, क्या आप मेरी ये इच्छा पूरी कर सकते हैं?”

साधु कहा – “बिल्कुल बेटा! मैं तुम्हें एक हीरा और एक मोती देता हूँ, उससे तुम जितने चाहे हीरे-मोती बना सकते हो।” साधु की बात सुनकर युवक की आँखों में आशा(उम्मीद) की ज्योति चमक उठी।

फिर साधु ने युवक को अपना दोनों हथेली आगे बढ़ाने को कहा, युवक ने अपना दोनों हथेलियां साधु के सामने कर दिया। फिर साधु ने उसके एक हथेली में अपना हाथ रखते हुए बोला- “बेटा ये दुनियां का सबसे कीमती और अनमोल हीरा है इसे “समय” कहते हैं, इसे जोर से अपनी मुट्ठी में जकड़ लो। इसके द्वारा तुम जितना चाहो उतना हीरा बना सकते हो। इसे कभी भी अपने हाथ से निकलने मत देना।

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फिर साधु अपना दूसरा हाथ युवक के दूसरी हथेली में रखकर कहा- “बेटा ये दुनिया का सबके कीमती मोती हैं, इसे धैर्य कहते हैं। जब किसी कार्य मे समय देने के बाद वांछित परिणाम प्राप्त न हो, इस धैर्य नामक मोती को धारण कर लेना। यदि ये दोनों मोती तुम्हारे पास हैं तो तुम दुनिया मे जो चाहोगे वो पा सकते हो”।

युवक ध्यान से साधु की बात सुनकर, उन्हें धन्यवाद कर वहां से चला गया।कयुकि युवक को सफलता प्रप्ति के दो गुरु मंत्र मिल चुका था। युवक ने निश्चय किया कि कभी अपना समय व्यर्थ नही गवायेगा और सदा धैर्य से काम लेगा।
युवक कुछ समय बाद हीरे के बड़ा व्यपारी के घर काम करना शुरू किया और कुछ वर्षों तक खूब मन लगाकर काम किया और व्यवसाय का हर गुर सीखता रहा और एक दिन वह भी अपने मेहनत और लगन से अपना सपना साकार करते हुए हीरे का बहुत बड़ा व्यपारी बन गया।

सीख:-

दोस्तों इस कहानी से हमे यही सिख मिलती है कि – लक्ष्य प्राप्ति के लिए सदा ‘समय’ और ‘धैर्य’ नाम के हीरे-मोती अपने साथ रखें। अपना समय कभी व्यर्थ ना करें और कठिन समय में धैर्य का दामन ना छोड़ें, सफ़लता अवश्य प्राप्त होगी।

2. Best Inspirational story in hindi – मौत का भय

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दोस्तों पुराणों में कहा गया हैं, ‘जो जन्म लेता है, उसकी मृत्यु निश्चित है। इसलिए मृत्यु से भयभीत होने की जगह सत्कर्मों के माध्यम से मरण को शुभ बनाने के प्रयास करने चाहिए।’

दोस्तों एक मछुआरा था, वह समुद्र से मछलियाँ पकड़कर और उन्हें बिजर बेचकर अपनी जीविका चलाता था। एक दिन एक आदमी उसके पास आकर बैठा, और उसने पूछा, ‘मित्र, क्या तुम्हारे पिता है?’
तो मछवारे ने जवाब दिया, ‘नहीं, उन्हें समुद्र की एक बड़ी मछली निगल गई।’ उसने फिर पूछा, ‘और तुम्हारा बड़ा भाई ? ‘ फिर मछुआरे ने जवाब दिया, ‘समुन्द्र में नौका डूब जाने के कारण वह भी मर गया।’

उस आदमी ने फिर पूछा, ‘तुम्हारे दादाजी और चाचाजी की मृत्यु कैसे हुई ?’ मछुआरे ने बताया कि वे भी समुद्र में लीन हो गए थे। आदमी ने यह सुना, तो बोला, ‘मित्र, यह समुद्र तुम्हारे विनाश का कारण है, इसके बावजूद भी तट पर आकर जाल डालते हो। क्या तुम्हें मरने कर भया नहीं है ?

मछुआरा बोला, ‘भैया, मौत को किसने देखा, जिस दिन आनी होगी, आएगी ही। क्या तुम्हारे घरवालों में से दादा, परदादा, पिता में से शायद ही कोई इस समुद्र तक आया था। फिर भी वे सब चल बसे । मौत कब आती है और कैसे आती है, यह आज तक कोई भी नहीं समझ सका है, फिर मैं बेकार ही मौत से क्यों डरूँ??

भगवान् महावीर ने कहा था – ‘नाणागमो मच्चुमुहस्य अत्थि’ यानी मृत्यु किसी भी द्वार से आ सकती है, इसलिए आत्मज्ञानी ही मौत के भय से बचा रह सकता है।

दोस्तों हर काम में रिस्क होता हैं, रिस्क से डरना नही चाहिए, कयुकि डर के आगे जीत हैं।


3. मानव जब जोर लगाता है , पत्थर पानी बन जाता है – Best Motivational Story For Students
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मानव जब जोर लगाता है , पत्थर पानी बन जाता है। दोस्तों हम सब लोग यह अच्छे जानते है की अगर इंसान कोई भी काम को ठान ले तो वह कर सकता है। इसमें कही कोई शक नही हैं, लेकिन अगर वह काम मन से किया जाये तो और अच्छा होता है। आप लोगो को मैं एक उदहारण देता हूँ, जैसे की रसी के बार – बार घिसने से कुवा पर निसान बन जाता है, लेकिन यह काम एक बार करने पर कभी नहीं होता है। इसके लिए आप को लगातार किसी काम के पीछे लगना पड़ता है तभी आपको सफलता मिलेगी।

दोस्तों आप सब ने हिटलर का नाम तो सुना ही होगा, हिटलर एक बहुत ही अच्छा बात बोला था की “अगर आप को रेस जीतना है तो पहले उसमे भाग लेना सीखो”। जो रेस में भाग नही लेता वो रेस कभी नहीं जीत सकता है। उसका ये बात बिलकुल सही है ,अगर आप जीवन मे लड़ना नहीं सीखोगे तो आप कभी भी जीवन मे आगे नहीं बढ़ सकते हो।

हममें से बहुत ऐसे लोग हैं जो तब तक संघर्ष करता रहता हैं, जब तक उसको उसकी मंजिल नही मिल जाती। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो थोड़ी सी परेशानी होने पर घबरा कर हार मान कर छोड़ देते हैं। जीवन मे सफलता पाने के लिए खुद लड़ना पड़ता हैं, तभी आप कुछ कर सकते हो, दूसरों के सहारे तो कमजोर लोग लड़ते हैं।

जो इंसान अपने जीवन मे परेशानी को सही से समझ नहीं पता है वह इंसान जीवन को सही से समझ ही नहीं पाता है। और जब कभी मुसीबत आती है तो खुद हार मान जाता है, इसलिए इंसान को दोनों पहलु मे जीना अच्छे से सीख लेना चाहिए।

जीवन मे तब तक लड़ते रहो, जब तक आप को अपनी मंजिल मिल न जाये।

4. बिल्ली और हथिनी की प्रेरणादायक कहानी – Motivational Story in Hindi for success

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दोस्तों आज की ये कहानी आपलोगो को कुछ नया शिखा देगी। एक घना जंगल था जिसमें बहुत सारे जानवर रहते थे, उन्हीं जानवरों में से एक बिल्ली और एक है हथिनी थी। दोनों के बीच काफी अच्छी दोस्ती थी। दोनों दोस्तों के बीच इतना प्यार था कि हमेशा एक दूसरे के सुख और दुख में साथ रहते थे।

एक दिन की बात है बिल्ली और हथिनी दोनों एक साथ गर्भवती हो गए, इससे दोनों बहुत ही खुश थे। दोनों एक दूसरे के साथ रहते और एक दूसरे की बहुत ही ख्याल रखते थे। समय बीतता गया और 6 महीने बाद बिल्ली ने 3 बच्चो को जन्म दिया। फिर अगले 6 महीनो में ही बिल्ली ने तीन ओर बच्चो को जन्म दिया। बिल्ली अपने बच्चो के साथ बहुत ही खुश रहा करती थी।

एक दिन बिल्ली और हथिनी दोनों एक साथ नदी के किनारे बैठे थे, तभी बिल्ली ने हथिनी को ताना मारते हुए कहा – देखो न मैंने एक साल में ही छः बच्चो को जनम दे दिया है और तुम एक साल से भी ज्यादा हो गया, लेकिन अभी तक माँ नहीं बन पायी। यह सुनकर हथिनी को बहुत ही बुरा लगा और उसने बिल्ली से गुस्से में बोली – तुमको शायद यह बात नहीं पता है की मैं किसी बिल्ली के बच्चे को नहीं जनम दे रही हूँ । मेरे पेट में हाथी का बच्चा है जब यह पैदा होगा तो सब लोग देखते रह जायँगे। मुझको दो साल जरूर लगेगा इसको पैदा करने में, लेकिन जब यह जमीन पर चलेगा तो जमीन हिल जाएगी और जब यह सड़क पैर चलेगा तो लोग पीछे हट जायेंगे।

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हथिनी की यह बात सुनकर बिल्ली शर्मा गई और बोली आप सही बोल रही हो बहन।मैं तो बस ऐसे ही मजाक कर रही थी।

दोस्तों इस कहानी से यही सीख मिलता है की कभी भी बड़ा काम जल्दी नहीं होता है, उसमे वक्त लगता है और उसका परिणाम हमेसा ही बहुत अच्छा होता है।

दोस्तों उम्मीद करते है आपको ये कहानी अच्छा लगा होगा, इस कहानी को अपने दोस्तों और फैमिली के साथ जरूर शेयर करें, ताकि उन सबको भी इसका फायदा मिल सकें।

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